बॉलीवुड के दो प्रख्यात फिल्म मेकर्स अनुभव सिन्हा और अशोक पंडित के बीच हाल ही में ट्विटर पर एक विवाद देखने को मिला। ये विवाद तब शुरू हुआ जब सिन्हा ने अमेरिकी पुलिसकर्मियों की तरह देश के लोगों को भी अल्पसंख्यकों के सामने एकघुटने पर झुककर माफी मांगने की चुनौती दी। इसके बाद अशोक पंडित ने तीन ट्वीट करते हुए उन्हें जवाब दिए और कहा कि देश के टुकड़े करने वालों को फंड करना बंद कीजिए।
अनुभव सिन्हा ने गुरुवार रात किए अपने ट्वीट में लिखा, 'मैं हिंदुस्तानियों को challenge करता हूँ, एक तारीखतय करो और देश के अल्पसंख्यकों के सामने एक घुटने पे झुक के दिखाओ। करते हो #2 अक्टूबर को? माफीमाँगते हैं इतने सालों की। ट्विटर-फेसबुक से आगे निकलो।'
अशोक पंडित बोले- कश्मीर से शुरुआत करिए
अनुभव सिन्हा को जवाब देते हुए अशोक पंडित ने अपने पहले ट्वीट में लिखा, 'चलिए कश्मीर से शुरुआत करिए और वहाँ के मुसलमानों के घुटने टिकवा कर माफ़ी मंगवाइए! 4 लाख कश्मीरी हिन्दुओं को बेघर किया है उन लोगों ने! फिर गांधी परिवार के घुटने टिकवा देना सिखों के नरसंहार के लिए! लम्बी लिस्ट है भेजता रहूँगा!'
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दूसरे ट्वीट में सिन्हा को नसीहत दी
अपने दूसरे ट्वीट में अशोक पंडित ने लिखा, 'दोस्त हम एक ऐसी इंडस्ट्री से ताल्लुक रखते हैं जहां हजारों सिख, मुसलमान, ईसाई, हिंदू और अन्य धर्मों के लोग एक साथ प्यार से काम करते हैं! ठीक इसी तरह देश में भी सब मिलकर रहते हैं! देश के टुकड़े करने वालों को फंड करना बंद कर दीजिए!'
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तीसरे ट्वीट में पंडित ने की अपील
तीसरे ट्वीट में अशोक पंडित ने लिखा, 'मैं हिंदुस्तानियों को रिक्वेस्ट करता हूं, एक तारीख तय करो और देश के सारे अर्बन नक्सल, अवॉर्ड वापसी गैंग, किटी पार्टी पत्रकार, टुकड़े-टुकड़े गैंग के 2 अक्टूबर को घुटने टिकवाकार माफी मंगवाओ! देश के लिए यह नासूर बन चुके हैं!'
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सिन्हा ने दिया दूसरे ट्वीट का जवाब
अशोक पंडित के दूसरे ट्वीट का जवाब देते हुए अनुभव सिन्हा ने लिखा, 'जी अवश्य। मैं अखबार दोबारा पढ़ता हूँ। मेरी त्रुटि होगी, मुझसे ही छूट गया होगा कुछ।'
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सिन्हा बोले- जिसकी जहां श्रद्धा हो क्षमा मांग ले
जब एक टेलीविजन पत्रकार ने सिन्हा से पूछा कि 'कब-कब, कौन-कौन, कहाँ-कहाँ, किस-किस के सामने घुटने टेकेगा!!' तो सिन्हा ने जवाब देते हुए कहा, 'जिसकी जहां श्रद्धा हो। जिसको अपने अंदर झांक के लगे कि ये गलत किया है मैंने वो झुक के क्षमा माँग ले। इसके बदले कुछ अपेक्षा नहीं होनी चाहिए। बस अपने मन की शांति के अतिरिक्त। शेष इतिहास सबका साक्षी है। विश्व के सबसे शक्तिशाली शासक हिटलर का कोई पक्षधर छोड़ा नहीं समय ने।'
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