प्रसिद्ध निर्देशक बासु चटर्जी के निधन के बाद उनके साथ काम कर चुके कुछ कलाकारों ने उनसे जुड़े कुछ किस्से दैनिक भास्कर के साथ साझा करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर जरीना वहाब, रजा मुरादऔर अनिल धवन ने उनके साथ बिताए वक्त को याद करते हुए अपना अनुभव हमारे साथ शेयर किया। रजा मुराद ने बताया कि ऋषिकेश मुखर्जी से पहले बासु चटर्जी ने जया भादुड़ी को फिल्म ऑफर की थी।
जरीना वहाब ने कहा, 'बासु चटर्जी के निधन का मुझे बेहद खेद है। बतौर लीड हीरोइन मेरी पहली फिल्म के डायरेक्टर वे ही थे। उनसे मेरी आखरी मुलाकात तकरीबन 2 साल पहले हुई थी, जब अमोल पालेकर अपनी वाइफ के साथ पुणे से मुंबई आए थे। तब हम लोगों ने एक गेट-टू-गेदर रखा था और साथ में खाना खाने के बाद हम सब बासु दा से मिलने गए थे। वे उस उम्र में भी फिट थे और हम सब से मिलकर बहुत खुश भी हुए थे।'
जरीना बोलीं-सेट पर रुमाल चबाते थे बासु दा
वहाब ने कहा, 'बासु चटर्जी बेहद खुशमिजाज शख्स थे। मैंने कभी उन्हें सेट पर चिल्लाते हुए नहीं देखा। एक चीज जो मुझे बासु चटर्जी के बारे में हमेशा याद है कि वे अक्सर सेट पर रुमाल चबाते थे और मैं हमेशा हंस के उनसे कहती थी, कि आप गाय की तरह रुमाल क्यों चबाते हैं। उनकी एक खूबी यह भी थी कि वे बहुत ही रियलिस्टिक फिल्में बनाते थे।'
अनिल धवन बोले- उनकी फिल्में आज भी प्रासंगिक
बासु दा को याद करते हुए अनिल धवन ने कहा, 'बासु चटर्जी द्वारा बनाई गई फिल्में आज भी देखी जाती हैं और मौजूदा हालात से भी मेल खाती हैं। मैंने उनके साथ 'पिया का घर' की थी और उस वक्त हम फिल्म इंडस्ट्री में नए थे। बासु दा हमें हर चीज बहुत प्यार से समझाया करते थे। उस फिल्म में ऐसी परिस्थितियां दिखाई गई है, जो तब भी थी और आज भी हैं। जिसमें एक कमरे में पूरा परिवार रह रहा है। लोग शादी नहीं कर पा रहे हैं, क्योंकि अपने बीवी-बच्चों को कहां पर रखेंगे। पब्लिक टॉयलेट यूज करते हैं क्योंकि बाथरूम नहीं है, और यही सारी परेशानियां मुंबई में आज भी हैं।'
असल ट्रैफिक में फिल्माए गए थे गाने
आगे धवन ने बताया, 'उस फिल्म को देखकर हर शख्स को लगता था कि ये उसकी अपनी कहानी है। इस फिल्म की शूटिंग में भी कई अड़चनें आई थीं। इसमें जो गाने हैं वो असल ट्रैफिक में फिल्माए गए थे। जहां कैमरा छुपा-छुपा कर शूटिंग की जाती थी, जो आज के दौर में बिल्कुल भी संभव नहीं है। बासु चटर्जी की एक और बात मुझे बहुत प्यारी लगती थी, वे अक्सर हंसकर कहा करते थे कि जल्दी-जल्दी शूटिंग खत्म करो जितनी जल्दी शूटिंग खत्म करोगे उतनी ही जल्दी तुम्हें घर जाने दूंगा और यह सुनकर मैं हमेशा हंस पड़ता था।'
कहते थे- जो सीखकर आए हो सब भूल जाओ
आगे धवन ने कहा, 'मुझे याद है 'पिया काघर' के समय मैं और जया भादुड़ी दोनों ही इंस्टीट्यूट से पढ़कर आए थे और बासु दा ने हमें यही सलाह दी थी कि हम जो कुछ भी पढ़कर और सीखकर आए हैं वह सब भूल जाएं और जैसा वे कहते हैं वैसा ही करें। फिल्म बहुत हिट हुई थी, लोगों ने फिल्म को बहुत प्यार दिया और जब कभी कोई सीन अच्छा हो जाता था तो बासु दा बहुत तारीफ करते थे।'
रजा मुराद बोले- जया भादुड़ी को पहले बासु दा ने देखा था
दिवंगत निर्देशक को याद करते हुए रजा मुराद ने कहा, 'मैं बासु चटर्जी को तब से जानता हूं जब वे ब्लिट्ज में कार्टूनिस्ट थे। वे बेहद ही अच्छे कार्टून बनाया करते थे और उनका सेंस ऑफ ह्यूमर भी कमाल का था। जिस इंस्टिट्यूट में मैं पढ़ता था, एक बार वे वहां आए और अपनी फिल्म 'सारा आकाश' के लिए जया भादुड़ी को लीड रोल ऑफर किया, किंतु हमारे प्रिंसिपल ने जया को शूटिंग के लिए 35 दिनों की छुट्टी की इजाजत नहीं दी। अगर जया को इजाजत मिल जाती तो ऋषिकेश मुखर्जी की जगह बासु चटर्जी को उन्हें लांच करने का क्रेडिट मिलता। उस वक्त मैंने पहली बार जया भादुड़ी के हाथ में एक बाइंडिंग स्क्रिप्ट देखी थी जो हम सबके लिए नया था।'
'वे बहुत खूबसूरती से मध्यम वर्ग को दिखाते थे'
आगे रजा मुराज ने बताया, 'अगर उनकी फिल्मों को देखा जाए तो वे आम इंसानों से जुड़ी फिल्में बनाया करते थे। उनकी फिल्में बहुत साधारण हुआ करती थीं, उस समय जब राजेश खन्ना जैसे बड़े सितारे थे और चॉकलेट बॉय हीरो की तलाश हुआ करती थी, उस समय उन्होंने साधारण नैन नक्श वाले अमोल पालेकर को लॉन्च किया। उनकी फिल्मों में मध्यम वर्ग के परिवार को बहुत ही खूबसूरती से और बारीकी से दिखाया जाता था। उनकी फिल्मों में लोकल ट्रेन, बस स्टॉप इन सभी के दृश्य अवश्य होते थे।'
'अपनी फिल्मों में हमेशा सरप्राइस स्टार रखते थे'
रजा मुराद के मुताबिक, 'सुभाष घई और कुछ अन्य डायरेक्टर्स की तरह वे अपनी फिल्म में किसी ना किसी शॉर्ट में जरूर नजर आते थे। कभी एक सीन के लिए अमिताभ बच्चन को बुला लिया या किसी गाने में धर्मेंद्र और हेमा मालिनी को दिखा दिया। ऐसे सरप्राइज वे हमेशा अपनी फिल्मों में लेकर आते थे।
बड़े कलाकारों वाली फिल्में लोगों को पसंद नहीं आई
मुराद ने कहा, 'मेरा मानना है कि बासु दा ने छोटे कलाकारों के साथ जितनी भी फिल्में बनाईं, सभी हिट गई थीं। लोगों ने उन्हें बहुत सराहा और उसे आईडेंटिफाई भी कर पाए। हालांकि यह एक अजीब विडंबना है कि जो फिल्में उन्होंने बड़े सितारों के साथ बनाई, वे दर्शकों के मन को नहीं छू पाईं। उनकी कुछ फिल्में जैसे अमिताभ बच्चन के साथ 'मंज़िल', जितेंद्र और नीतू सिंह के साथ 'प्रियतमा', राजेश खन्ना के साथ फिल्म 'चक्रव्यूह' या इसके अलावा भी जब कभी उन्होंने बड़े सितारों के साथ कोई फिल्म बनी बनाई वो दर्शकों पर इतना प्रभाव नहीं डाल पाईं।'
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